– पंडित अभय चंद्र व्यास
भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी को रोहिणी नक्षत्र में अर्धरात्रि को हुआ था। इस बार भाद्रपद की अष्टमी दो दिनों तक है। अष्टमी तिथि का प्रवेश इस बार 18 अगस्त 2022 दिन गुरुवार को रात्रि में हो रहा है। इस कारण कई लोग 18 अगस्त को जन्माष्टमी का व्रत रखेंगे। वहीं शास्त्रों के अनुसार हिंदू धर्म में उदया तिथि सार्वभौमिक माना गया है, इसलिए 19 अगस्त को जन्माष्टमी का व्रत रखेंगे। वैष्णव संपद्राय भी 19 अगस्त को ही श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाएगा।
ज्योतिर्विद पंडित अभय चन्द्र व्यास के अनुसार वास्तव में जन्मतिथि हमेशा उदयातिथि में मनाते है और पुण्यतिथि हमेशा जिस समय मृत्यु हुई है और उस समय क्या तिथि चल रही है उस हिसाब से मनाते हैं। इस हिसाब से भगवान कृष्ण जन्मोत्सव 19 अगस्त को मनाना ही सर्वश्रेष्ठ है।
दोनों ही तिथियों में नहीं है रोहिणी नक्षत्र
जन्माष्टमी और कृष्ण जन्मोत्सव में एक चीज सर्वमान्य होती है और वह है रोहिणी नक्षत्र। क्योंकि रोहिणी नक्षत्र में ही भगवान का जन्म हुआ था। रोहिणी नक्षत्र में उत्सव मनाने की परंपरा है। लेकिन इस बार दो तिथियों में अष्टमी तिथि होने के बाद भी 18 और 19 को रोहिणी नक्षत्र नहीं पड़ रहा है। रोहिणी नक्षत्र 20 को 01:53 बजे प्रवेश कर रहा है।
ज्योतिर्विद व्यास के अनुसार 18 अगस्त को रात्रि में 9:21 बजे अष्टमी का प्रवेश हो रहा है। इसलिए इस तिथि में भी लोग जन्माष्टमी का व्रत रखेंगे। जबकि निर्णय सागर पंचाग में 19 को जन्माष्टमी मनाने पर जोर दिया गया है। वैसे भी उदया तिथि मानने वाले लोग 19 अगस्त शुक्रवार को जन्माष्टमी मनाएंगे। चूंकि यह व्रत निशाव्यापनी है, 18 को मनाया जा सकता है। निर्णय सागर पंचाग में भी 19 को जन्माष्टमी दर्शाया गया है।
भगवान कृष्ण की जन्मस्थली मथुरा में इस बार जन्माष्टमी 19 अगस्त को मनाई जा रही है। इस आधार पर 19 अगस्त को ही कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाना चाहिए।
बीकानेर नगरी में पर्व लक्ष्मीनाथ मंदिर और मरुणायक मंदिर के आधार पर मनाए जाते है। लक्ष्मीनाथ मंदिर में 18 अगस्त को जन्माष्टमी है और मरुणायक मंदिर में 19 अगस्त को जन्माष्टमी है।




