
ज्योतिष शास्त्र में गुरु यानि बृहस्पति ग्रह का बहुत बड़ा दर्जा है। इन्हें समस्त देवताओं का गुरु माना जाता है। गुरु ज्ञान के सलाह के दाता हैं। बड़े बुजूर्गों, वरिष्ठ अधिकारियों की कृपा गुरु की कृपा से ही संभव हैं। यदि आपकी कुंडली में गुरु शुभ हैं तो आपको विकट परिस्थितियों में भी सहयोग मिलता रहता है। कर्क राशि में बृहस्पति उच्च के होते हैं तो मकर राशि में इन्हें निकृष्ट माना जाता है। ये धनु व मीन राशि के स्वामी हैं। सूर्य, चंद्रमा व मंगल के साथ इनकी मित्रता है। तो शुक्र व बुध के साथ ये शत्रुवत संबंध रखते हैं। राहु-केतु व शनि के साथ इनका तटस्थ संबंध है। बृहस्पति में एक खास बात यह भी है कि इनकी भले ही किसी ग्रह से शत्रुता हो लेकिन जो ग्रह इनके साथ मित्रता नहीं रखते वे इनके शत्रु भी नहीं है यानि अधिकतर ग्रहों का बृहस्पति से तटस्थ रिश्ता है। गुरु विवेकशील ग्रह माने जाते हैं और चीज़ों को एक विस्तृत पटल पर समझने के लिये सद्बुद्धि गुरु से ही मिलती है। इसलिये इन्हें संपत्ति व ज्ञान का कारक भी माना गया है




