राजस्थान

पशुओं में लम्पी स्किन डिजीज लक्षण व उपचार

लम्पी स्किन डिजीज गायों एवं भैसों में तेजी से फैलने वाला एक वायरस जनित रोग है। इस रोग से सभी उम्र के पशु प्रभावित होते है। जिले के बहुत से गाय एवं भैंसों में इस रोग का प्रकोप पाया गया है। यह एक प्रकार का संक्रामक रोग है, जो कि वायरस के कारण होता है। यह रोग केवल पशुओं में ही पाया जाता है। चिचड, मक्खी एवं मच्छर इस रोग के प्रमुख वाहक है।
लक्षण
इस रोग प्रकोप में पशुओं के पूरे शरीर पर त्वचा पर छोटी-छोटी गांठे हो जाती है। रोग की शुरूआत पशु में तेज बुखार (103 से 105 डिग्री फेरनहाईट) होता है। कुछ पशुओं में पैंरो पर सूजन आ जाती है, नाक से एंव आंखों से पानी आना शुरू हो जाता है।
उपचार
यह रोग 10-15 दिन बाद पशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता के अनुसार स्वतः ही ठीक हो जाता है, वायरस पर कोई दवा असर नहीं करती है। तेज बुखार एंव अन्य लक्षणों के आधार पर कमजोर पशु एंव उच्च दुग्ध क्षमता वाले पशुओं को नजदीकी पशु चिकित्सक को दिखा कर उपचार करावें।
बचाव
संक्रमण से बचने हेतू पशुओं के आवास गृह को साफ-सुथरा रखें। चिचड़ एवं अन्य परजीवियों से पशु को बचा कर रखें। नीम के पत्तों का पशुओं के आवास गृह व बांधने के स्थान पर धुआं करें। रोग ग्रस्त पशुओं को स्वस्थ पशुओं से दूर रखें।
विशेष सावधानी
यह देखने में आ रहा है कि पशुपालकों द्वारा बीमारी से मृत पशु को सड़क किनारे, खुले स्थानों पर या फिर नहरों में डाला जा रहा है जो कि उचित नहीं है। इससे रोग अधिक तेजी से फैलने की सम्भावना रहती है। जिससे पशुधन को अधिक नुकसान होगा। पशुपालकों को सलाह दी जाती है कि इस बीमारी से मृत पशु को गड्डा खोदकर नमक इत्यादि डालकर दबा देवें जिससे वायरस संक्रमण न फैले।

Leave a Reply

Your email address will not be published.