बीकानेर

अमावस की काली-अंधेरी रातों को एक दिये की लौ से चुनौती देने का नाम है दीपावली :- मस्ताना

अमावस की काली-अंधेरी रातों को एक दिये की लौ से चुनौती देने का नाम है दीपावली :- मस्ताना

 

ये रात घनेरी काली है,

पर कब रुकती दिवाली है,

इन रातो से जाकर कह-दो

 सुबह बस होने वाली है।।

~ मस्ताना

 

अमावस की काली-अंधेरी रातों को एक दिये की लौ से चुनौती देना का नाम है दीपावली। दीपावली यानी अंधकार पर प्रकाश की जीत का पर्व। दीपावली भारतीय त्योहारों में सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह त्योहार बहुत ही शिक्षाप्रद भी है। आइए दीपावली से मिलने वाली 5 शिक्षाओं पर गौर करें :-

 

1. दुसरो के लिए जलना सीखिए, दूसरों से नहीं :- दीपावली का मुख्य आकर्षण दीपक होता है। दीपक से हम परोपकार की शिक्षा भी ले सकते है। दीपक स्वयं जल कर प्रकाश को फैलाता है। अर्थात हमे भी अपना स्वभाव ऐसा बनाना चाहिए कि हम सदैव दूसरों के काम आ सके। कवि मैथिलीशरण गुप्त अपनी कविता में कहते है कि :-

“मनुष्य मात्र बन्धु है” यही बड़ा विवेक है¸

पुराणपुरूष स्वयंभू पिता प्रसिद्ध एक है।

फलानुसार कर्म के अवश्य बाह्य भेद है¸

परंतु अंतरैक्य में प्रमाणभूत वेद हैं।

अनर्थ है कि बंधु ही न बंधु की व्यथा हरे¸

वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।।

 

2. अलग-अलग रंगों से सजती है रंगोली :- इस संसार मे अधिकतर लोगों को इस बात से शिकायत होती है कि वे जिसके साथ रहते है उनसे उनके विचार नहीं मिलते, उनकी पसंद नहीं मिलती, उनके तौर-तरिके नहीं मिलते आदि। परन्तु गौर से यदि देखा जाए तो ऐसी कोई समस्या है ही नहीं। वास्तव में “हमारी विभिन्नता ही हमारी विशिष्टता है।” ये बात आप रंगोली से सीख सकते है। रंगोली में विभिन्न प्रकार के रंगों का प्रयोग किया जाता हैं ये विभिन्न रंग ही रंगोली को खूबसूरत बनाते है। अतः यदि आपके विचार नहीं मिलते है तो दूसरे के विचार सुनिए उसमे कुछ नया ही मिलेगा, यदि आपकी पसंद नहीं मिलती तो दूसरे की पसंद एक बार उपयोग करके देखिए आपको फिर कुछ नया मिलेगा। ये ‘नया मिलना’ ही मानव सभ्यता की जीत है।

 

3. पुष्प-मालाओं से सीखिए तुलना न करना :- अध्ययन में तुलनात्मक दृष्टिकोण विद्यर्थियों को विभिन्न सभ्यताओं, विभिन्न व्यवस्थाओ आदि में तुलना कर एक बेहतर निष्कर्ष तक पहुंचने में सहायता प्रदान करता है परन्तु जीवन मे ये ही तुलना जीवन को बर्बाद करने के लिए काफी है। जैसे उसने कर लिया और मैं नहीं कर पाया। उसके पास तो वो है और मेरे पास नहीं है आदि। दूसरों से तुलना करने के कारण मनुष्य अपने जीवन मे संचित उपलब्धियों को भी निम्न मानने लगता है। हमे इस दीपावली के पर्व पर पुष्प मालाओं से सीखना चाहिए कि वे एक दूसरे से कभी तुलना नहीं करते। कभी भी कोई गुलाब किसी गेंदे से अपनी तुलना नहीं करता दोनों अपने स्थान पर श्रेष्ठ है।

 

4. मिठाई से सीखिए की जिंदगी में मिठास जरूरी हैं :- बड़े बुजुर्ग सदैव कहते है कि हमें बोलने से पहले कई बार सोचना चाहिए क्योंकि आपके शब्दों का सुनने वाले पर सकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकता है और नकारात्मक भी। आपके शब्द किसी को जीवन भी दे सकते है तो किसी के प्राणों का हरण भी कर सकते है। अधिकतर आत्महत्याएं किसी दूसरे के क्रोध व कटु वचनों को सुनकर व निराशा के अंधकार में डूबकर ही हुई हैं। अतः इस दीपावली हमे मिठाई से सीखना चाहिए कि हमें मीठे वचनों का प्रयोग ही करना चाहिए ताकि किसी को हमारे शब्दों से कष्ट न हो।

 

5. तमसो मा ज्योतिर्गमय को साकार करती है दीपावली :- दीपावली सकारात्मकता का त्योहार है। सुख-दुख, आशा-निराशा तो जीवन पथ के विश्राम है, जिनसे हर पथिक को गुजरना ही पड़ता है। परन्तु विश्राम पर नियत होकर बैठ जाना तो उचित नहीं, आगे और रास्ते है जो आपकी प्रतीक्षा कर रहे है। इसलिए उठिए और चलिए क्योकि चलना ही आपके जीवित होने का प्रमाण है। दीपावली भी इसी सकारात्मकता का प्रतीक है। दीपावली में जलाया गया दीपक उस विराट अंधेरे को ललकारने का एक तरीका है और कुछ नहीं। ये ललकार हमारी चेतनता, जीवटता और जिजीविषा का प्रतीक है।

 

दोस्तो, आशा करता हूं ये लेख आपके लिए उपयोगी सिद्ध होगा और आप अपने जीवन में एक सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएंगे। अंत में इन पंक्तियों के साथ :-

“ है घना ही अंधकार, आस रख उजास की।

क्यों डरे रे ओ पथिक, जीत है विश्वास की।।

 

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाओं सहित

आनंद कुमार पुरोहित (मस्ताना)

निदेशक

स्टूडेंट सॉल्यूशन क्लासेज

8562815057

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