
बेटी ने दी पिता को मुखाग्नि..हर किसी की आँखें हो गई नम
बीकानेर,13 अक्टूबर। बेटे ही नहीं बेटियां भी आज के समय में बेटों की तरह माता-पिता के प्रति पूरा फर्ज निभाती हैं। बेटियां आज बेटों की ओर से की जाने वाली धार्मिक रस्मों को निभा रही हैं। पहले पिता की चिता में मुखाग्नि सिर्फ बेटा ही दे सकता है। बेटियां चिता को आग नहीं लगा सकती थी। इस रूढ़िवादी सामाजिक सोच से ऊपर उठकर बेटी सुपर्णा मेहता ने सोमवार को अपने पिता का अंतिम संस्कार किया। जब बेटी ने अंतिम संस्कार किया तो वहां मौजूद हर एक शख्स की आँखें नम हो गई।
दरअसल नाल निवासी वेदप्रकाश जी मेहता (सेवानिवृत वायु सेना) गत कुछ दिनों से बीमार थे और उनका रविवार को जयपुर के निजी अस्पताल में निधन हो गया था। उनका अंतिम संस्कार आज सुबह 9:30 बजे नाल में किया गया।
बेटी ने विधि-विधान के साथ निभाई रस्म
सुपर्णा मेहता ने अपने पिता की अर्थी को कंधा दिया। यही नहीं उनके घर से लेकर शमशान तक पिता की शव यात्रा के साथ गई। श्मशान घाट में बेटी ने पूरे रीति रिवाज के साथ पिता को मुखाग्नि देकर उनका अंतिम संस्कार कराया। यह मंजर देखकर हर किसी की आँखें नम हो गई। बेटी ने अपने दिल को कड़ा कर सभी रस्में निभाईं। मेहता ने कहा कि उनके पिता उन्हें बेटा ही मानते थे। आज उन्होंने अपने अधिकार को पूरा किया।




